पूज्यपाद गुरुदेव
ब्रह्मर्षि कृष्ण दत्त जी महाराज का जीवन, साधना एवं दिव्य विरासत।

पूज्यपाद गुरुदेव ब्रह्मर्षि कृष्ण दत्त जी महाराज
जीवन परिचय
पूज्यपाद गुरुदेव ब्रह्मर्षि कृष्ण दत्त जी महाराज एक विशुद्ध आत्मा थे, जिन्होंने जन्म-जन्मांतरों के तप से अर्जित ज्ञान को मानवता के कल्याण हेतु समर्पित किया। उनका जीवन सरलता, करुणा एवं गहन आत्मबोध का प्रत्यक्ष उदाहरण था।
उनके प्रवचन गूढ़ आध्यात्मिक सत्यों को इतनी सरलता से प्रकट करते थे कि साधारण साधक भी उन्हें आत्मसात कर सकता था। उन्होंने सदैव यही उपदेश दिया कि आत्मा अजर, अमर एवं अविनाशी है।
“हे मानव! तू यत्न कर, तत्पर मन से ध्यान कर, तेरा सौभाग्य अखण्ड हो।”
जीवन यात्रा
जन्म एवं बाल्यकाल
बाल्यकाल से ही गुरुदेव में असाधारण वैराग्य एवं आध्यात्मिक जिज्ञासा के लक्षण प्रकट हुए।
साधना एवं तप
वर्षों की कठोर साधना एवं ध्यान के पश्चात् उन्होंने आत्मतत्त्व का साक्षात्कार किया।
लोक कल्याण
उन्होंने असंख्य साधकों को ज्ञान, ध्यान एवं धर्म के मार्ग पर दीक्षित किया।
दिव्य वाणी की विरासत
उनकी वाणी आज भी ग्रंथों, प्रवचनों एवं सत्संगों के माध्यम से जीवंत है।
शिष्य परंपरा

ब्रह्मचारी कृष्णदत्त जी

परंपरा के वाहक